Monday, August 27, 2018

उर्दू प्रेस रिव्यू: इमरान ख़ान की तुलना ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो से

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों की बात की जाए तो इस पूरे हफ़्ते नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के कई बयान ख़ासकर भारत-प्रशासित कश्मीर के बारे में दिए गए उनके बयान और अमरीका से उनकी बातचीत सुर्ख़ियों में रही.
इमरान ख़ान ने 21 मंत्रियों के साथ अपने मंत्रिमंडल का गठन किया है. इसमें 16 केंद्रीय मंत्री हैं और पांच सलाहकार हैं जिन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल है.
शाह महमूद क़ुरैशी को विदेश मंत्रालय, परवेज़ खटक को रक्षा मंत्रालय दिया गया है, जबकि गृह मंत्रालय का ज़िम्मा इमरान ख़ान ने ख़ुद अपने पास रखा है.
एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान के मंत्रिमंडल ने अपनी पहली बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनकी बेटी मरियम नवाज़ को ईसीएल (एक्ज़िट कंट्रोल लिस्ट) में डालने का फ़ैसला किया है.
साथ ही नवाज़ शरीफ़ के बेटे हसन और हुसैन नवाज़ और पूर्व वित्त मंत्री इस्हाक़ डार को गिरफ़्तार कर विदेश से पाकिस्तान लाने का फ़ैसला किया गया है.
विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में भारत का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान न सिर्फ़ पड़ोसी देश हैं, बल्कि दोनों ही देश परमाणु शक्ति भी हैं.
जंग के अनुसार भारत-प्रशासित कश्मीर का ज़िक्र करते हुए क़ुरैशी ने कहा कि हम चाहें या न चाहें कश्मीर एक समस्या है और दोनों देशों ने ये बात स्वीकार की है.
एक्सप्रेस अख़बार के मुताबिक़ क़ुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान की विदेश नीति अब विदेश मंत्रालय में ही बनेगी. अख़बार के मुताबिक़ एक पत्रकार ने जब ये पूछा कि पाकिस्तान की विदेश नीति तो सेना तय करती है तो अब क्या होगा, इसी के जवाब में नव-निर्वाचित विदेश मंत्री ने ये बातें कहीं.
इमरान ख़ान ने ट्वीट किया था
इमरान ख़ान और अमरीकी विदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत भी इस सप्ताह सुर्ख़ियों में रही.
अख़बार दुनिया के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्री ने इमरान ख़ान से फ़ोन पर बातचीत की और पाकिस्तानी धरती पर सक्रिय चरमपंथियों के ख़िलाफ़ ठोस कार्रवाई करने की अपील की. लेकिन पाकिस्तान इससे इनकार करता है.
अख़बार दुनिया के अनुसार पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमरीका के इस दावे को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया है.
अख़बार के अनुसार पाकिस्तानी विदेश मंत्री का कहना है कि अमरीकी विदेश मंत्री और इमरान ख़ान के बीच बहुत ही सकारात्मक बातचीत हुई. क़ुरैशी के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्री ने इमरान ख़ान से कहा कि अमरीका चाहता है कि पाकिस्तान से रचनात्मक संबंध स्थापित हो.
क़ुरैशी के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्री पांच सितंबर को पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं.इमरान ख़ान के बारे में आज कल पाकिस्तानी अख़बारों में रोज़ाना कोई न कोई लेख छप रहा है. जंग अख़बार के संपादकीय पेज पर जाने-माने राजनीतिक समीक्षक अफ़ज़ाल रेहान ने एक लेख लिखा है जिसका शीर्षक है, 'प्रधानमंत्री इमरान ख़ान: नया भुट्टो'
अफ़ज़ाल रेहान लिखते हैं कि भुट्टो भी अपने ज़माने में उतना ही लोकप्रिय थे जितना आज इमरान ख़ान हैं. रेहान के अनुसार दोनों के जीवन का सिर्फ़ एक ही मक़सद है, किसी भी तरह सत्ता हासिल करना और उस पर बने रहना.
कॉलमनिगार लिखते हैं कि ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए किस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते थे, ये सभी जानते हैं. उन्होंने व्यंग करते हुए लिखा कि इमरान ख़ान को भी अपनी ज़बान खोलने से पहले अपने सभी शब्दों को तौल लेना चाहिए.रधानमंत्री के चुनाव के बाद पाकिस्तान में राष्ट्रपति के चुनाव की ख़बरें भी चर्चा में हैं.
इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ ने डॉक्टर आरिफ़ अलवी को राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है.
अख़बार दुनिया के अनुसार मौजूदा हालात में डॉक्टर अलवी का राष्ट्रपति बनना लगभग तय है, लेकिन अगर विपक्ष एक साझा उम्मीदवार लेकर सामने आता है तो लड़ाई कांटे की हो जाएगी. विपक्षी पार्टियां रविवार को एक साथ बैठक कर रही हैं जिनमें साझा उम्मीदवार के नाम की घोषणा किए जाने की संभावना है.
इसके अलावा भारत के जाने-माने पत्रकार कुलदीप नैय्यर की मौत की ख़बरें भी सभी अख़बारों के पहले पन्ने पर छपी हैं.
कि भविष्य में आगे बढ़ने के लिए भारत और पाकिस्तान को बातचीत करनी होगी और कश्मीर समेत सभी मामलों का हल तलाशना होगा.

Thursday, August 16, 2018

新“怪兽”挑战气候谈判

最新一轮的联合国气候谈判 本周在德国波恩落下帷幕。会议警告说:如果要让各国进一步减少碳排放,加大对低碳能源的投入并适应气候变化,必须作出更多努力。

谈判者们分成三个平行的轨道,为去年12月达成的《巴黎协定 》充实细节,并制定出一个如何落实协议的“规则手册”。

然而,美国11月总统大选的结果有可能导致这个世界第二大排放国的减排承诺发生波折,这一谈判日程之外的事态给波恩会议带来了“一丝波澜”。

在确定获得共和党总统候选人提名之后,房地产巨头兼电视真人秀明星、亿万富翁唐纳德·特朗普再次
威胁要“撕毁” 巴黎协定。

“如果美国政府要一根筋地对巴黎协定抱有敌意,肯定对事情没有好处。”法国气候外交家劳伦斯·图比娅娜在波恩会议期间对记者如是说。

不过她又说:“但我认为协定不会因此而脱离既定的轨道。”

一些
评论家说,对于特朗普的说法不必过于当真,认为他的威胁不过是某种姿态而已。

他们的看法是,无论特朗普耍什么手段企图再重新谈判巴黎协定,都不可能产生什么明显的影响。这是因为无论美国政府怎么样,其他国家都将继续推动各自的气候计划,发展低碳产业。

此外,美国许多城市、州、以及具有巨大影响力的金融和技术企业,都已建立起强大的气候行动基础。

而且,由于特朗普房地产帝国聘请的环境顾问申请了建筑许可,要为其在爱尔兰的特朗普高尔夫球场修建防护墙来抵御气候变化造成的海平面上升,这位共和党候选人被
斥责为虚伪 。

尽管本周的气候谈判充满乐观的看法,也有一些人怀着挥之不去的担忧:如果特朗普成为总统(从本周的民调来看,这个可能性似乎越来越大),美国气候政策关键条款的落实将变得 更加困难。

主要问题之一是:如果美国无法兑现其气候承诺,那么美国的主要贸易伙伴还愿意让自己的产业背负碳相关的成本和减排措施吗?

奥巴马政府制定的旨在限制发电厂二氧化碳排放的《清洁电力计划》,在“特朗普总统”手中可能会
前途多舛 。

这是因为,法院裁决(包括一项来自美国最高法院的裁决)造成的延误导致该计划无法在今年11月大选前实施。

为了迎合煤炭产业而拖巴黎协定后腿的可不只美国一个。

日本是另外一个气候活动者们攻击的焦点。作为本周G7峰会的东道主,日本主持通过的 
联合声明在推进清洁能源行动上毫无作为。

绿色和平组织的主管珍妮佛·摩根说:“《伊势志摩联合声明》对如何应对气候变化阐释不足。”

她在一份声明中指出:“很高兴看到G7支持今年正式批准巴黎协定,但我们还希望看到G7领导人对于气候危机更加强有力的回应,能够用具体细节说明他们将如何以及何时采取行动。”

环境非政府组织指出,今年晚些时候在中国举行的G20峰会应该努力弥补日本G7峰会上气候承诺的不足。

和中国一样,日本也打算未来几十年在其能源结构中
大量使用煤炭,人们将日本视为切实落实宏伟碳减排目标道路上的一大障碍。

但是,人们对中国感到乐观,认为中国比日本更加开放,将会利用全球金融体系来为清洁能源和低碳技术发展筹集资金。

绿色和平组织的声明说:“解决未来最困难的政治问题,领导二十国集团利用公共和民间投资,实现巴黎协定中将温度上升控制在1.5摄氏度的目标,主要还要靠中国。”

与此同时,未来的联合国气候谈判也必须在如何将巴黎协定付诸实践上达成一致,这样各国才能在2018年的全球 
“大盘点”后深化碳减排,筹集所需的数万亿资金来支持其利用可再生能源,并制定各自措施,抵御极端天气侵袭。

克里斯蒂娜·菲格雷斯将在7月份卸下联合国气候变化框架公约执行秘书一职。她说,各国都在继续共同努力,但目前的清洁能源转型速度远不足以避免气候变化的最坏影响。

去年各国作出的碳减排承诺只能将
升温控制在3-4摄氏度,这样全球许多地方将遭受气候变化的严重影响,如遭遇频繁而且严重的旱灾、农作物歉收、海平面上升和强风暴等。

截至目前,已经有大约180个国家签署了巴黎协定,但它们依然面临如何使发电、工业和交通等行业摆脱化石燃料,转向低碳和可再生能源的艰巨任务。

基督教援助协会的气候顾问穆罕默德·阿杜说,在摩洛哥马拉喀什举行的下一次高级别联合国气候谈判必须开成一次“可再生能源会议”。

阿杜说,这次缔约方会议将是一个 “将对话转化为行动,实现把温度上升控制在1.5到2摄氏度的协议目标” 的重大契机。